सदियों से ब्रह्माण्ड मानव को आकर्षित करता रहा है. इसी आकर्षण ने खगोल वैज्ञानिकों को ब्रह्माण्डीय प्रेक्षण और ब्रह्माण्ड अन्वेषण (Cosmic exploration) के लिए प्रेरित किया. ब्रह्मांड और सौरमंडल के रहस्यों की कुछ परतों को खोलने के क्रम में हाल ही में अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने हमारे सौरमंडल के बाहरी छोर पर स्थित एक मध्यम आकार के चट्टान पता लगाया है. नासा के वैज्ञानिकों के मुताबिक इस चट्टान के कारण हमें ग्रहों के बनने की बुनियादी प्रक्रिया को फिर से समझने की ज़रूरत है. दरअसल, ‘एरोकोथ’ (Arrokoth) नामक इस प्राचीन खगोलीय पिंड (Ancient celestial body) के जरिए नासा के वैज्ञानिक ग्रहों के बनने की हमारी मौजूदा समझ को बदलने का दावा कर रहे हैं.
हमारे सौरमंडल (Solar system) का निर्माण कैसे हुआ इसको जानने का वैज्ञानिकों के पास कोई प्रत्यक्ष आधार नहीं हैं क्योंकि तारों और ग्रहों के बनने की प्रक्रिया में लाखों-करोड़ों वर्षों का समय लगता है. इसको लेकर हमारी मौजूदा सैद्धांतिक समझ यह है कि 13.7 अरब वर्ष पहले ब्रह्मांड की उत्पत्ति यानी बिग बैंग के तकरीबन 9 अरब वर्षों के बाद सूर्य और उसके परिवार के अन्य सदस्यों का जन्म हुआ. वैज्ञानिकों ने कंप्यूटर सिमुलेशनों के जरिए यह बताया था कि हमारा सूर्य और अन्य ग्रह एक विस्फोटक घटना के उत्पाद हैं. वैज्ञानिकों के मुताबिक एक अत्यंत सघन धूल और गैसों का बादल जिसे ‘नेब्यूला’ (Nebula) या नीहारिका कहते हैं, अपने ही गुरुत्वाकर्षण बल के कारण जब नेब्यूला सिकुड़ने लगता है तब तारों और ग्रहों का निर्माण होता है. केंद में स्थित तारे के आसपास छोटे-छोटे पत्थर और चट्टानें आपस में टकराकर बड़े चट्टानों का निर्माण करते हैं और हमारी वर्तमान समझ के मुताबिक आखिरकार यही विशाल चट्टानें एक जोरदार धमाके के साथ आपस में टकराकर ग्रहों और अन्य खगोलीय पिंडों का रूप अख़्तियार कर लेती हैं.